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मुद्रा का विकास

हमारा भारत देश बहुत बड़ा है।इतना बड़ा की इस दुनिया मे दूसरी सबसे अधिक आबादी वाला देश है।तो आप समझ जाए कि ये देश कितना बड़ा है।अभी इस देश की आबादी लगभग 137 करोड़ है।इसे नियंत्रण करने के लिए भी इस देश मे मुद्रा की आवश्यकता होती है।जैसे कि आप किसी प्रकार की खरीदारी करते है तो आप दुकानदार को भुगतना करते है।तो अगर हम जीवित रहना है तो हमे रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदनी पड़ेगी।और खरीदने पर भुगतान करना पड़ेगा।साथ ही भुगतान करने के लिए आपके पास मुद्रा की आवश्यकता होगी।तो बात घूम फिर के मुद्रा पर आ ही जाती है।तो आज हम मुद्रा के विकास पर बात करेंगे।की पहले मुद्रा किस अवस्था मे थी।अब किस अवस्था मे है।कैसे विकास हुआ।क्या विकास हुआ।तो नीचे आपको सभी प्रकार की जानकारी बारी बारी से मिल जाएगी।तो इस आर्टिकल को निचे स्वाइप करे ओर आगे पढ़े।
Development of money,मुद्रा का विकास
Development of money

वस्तु मुद्रा अवस्था

प्रारंभिक काल मे किसी एक वस्तु को मुद्रा के कार्य सम्पन्न करने के लिए चुन लिया गया था।और शिकार युग मे खाल या चमड़ा, पशुपालन युग मे कोई पशु जैसे गाय या बकरी जैसे तथा कृषि युग मे कोई अनाज जैसे कपास या गेहू आदि को मुद्रा का कार्य सम्पन्न करने के लिए चुना गया था।उस काल मे इसे ही मुद्रा के रूप में प्रयोग मिया गया।क्योंकि उस समय लोग इतने जानकार नही थे।ना ही कोई अधिक पढ़ा लिखा।तब उनके समय मे एक नाप बनाया गया जैसे अभी हम रुपये से सामान खरीदते है।उस समय मे लोग किसी वस्तु से वस्तु का लेनदेन करए थे।जैसे एक बकरी बराबर 10 किलो आटा या चावल।इस प्रकार की मुद्राओं का प्रयोग होता था उस समय।लेकि अभी दुनिया काफी आगे निकल गयी है।तो यह सुविधा अब नही रही।

सिक्के(धातु) वाली मुद्रा

प्रारंभिक काल मे किसी एक वस्तु को मुद्रा के कार्य सम्पन्न करने के लिए चुन लिया गया था।और शिकार युग मे खाल या चमड़ा, पशुपालन युग मे कोई पशु जैसे गाय या बकरी जैसे तथा कृषि युग मे कोई अनाज जैसे कपास या गेहू आदि को मुद्रा का कार्य सम्पन्न करने के लिए चुना गया था।उस काल मे इसे ही मुद्रा के रूप में प्रयोग मिया गया।क्योंकि उस समय लोग इतने जानकार नही थे।ना ही कोई अधिक पढ़ा लिखा।तब उनके समय मे एक नाप बनाया गया जैसे अभी हम रुपये से सामान खरीदते है।उस समय मे लोग किसी वस्तु से वस्तु का लेनदेन करए थे।जैसे एक बकरी बराबर 10 किलो आटा या चावल।इस प्रकार की मुद्राओं का प्रयोग होता था उस समय।लेकि अभी दुनिया काफी आगे निकल गयी है।तो यह सुविधा अब नही रही।

पत्र मुद्रा का प्रचलन

पत्र मुद्रा यानी कगज द्वारा बना हुआ मुद्रा।एक ऐसा कागज जो किसी देश के सरकार द्वारा व गवर्नर के द्वारा मुहर और हस्ताक्षर किया गया हो वो एक पत्र मुद्रा के रूप में मन जाता है।सिक्के को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाने में कठिनाई  होती थी।इसलिए पत्र मुद्रा का प्रचलन शुरू हुआ।वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशो में पत्र मुद्रा का ही प्रचलन है।देश का केंद्रीय बैंक कागजी नोट का प्रचलन करता है।हमारे देश का केंद्रीय बैंक RBI-Reserve Bank Of India है।मतलब हमारे देश मे जितने भी प्रकार के मुद्रायें प्रचलित है।सारे के सारे RBI के द्वारा ही जारी किया जाता है।इस कागजी मुद्रा को बनाने के लिए हमारी सरकार दूसरे देशो से एक खास प्रकार की कागज मंगवाती है।और उसके बाद हमारे ही देश में इसकी छपाई होती है।

प्लास्टिक मुद्रा

प्लास्टिक मुद्रा मतलब की या मुद्रा प्लास्टिक से बना हुआ है।आजकल प्लास्टिक मुद्रा का प्रचलन जोरो पर है।प्लास्टिक मुद्रा के एटीएम सह डेबिट कार्ड,क्रेडिट कार्ड आदि प्रसिद्ध है।जैसे कि हमसब जानते है कि हमारे देश मे कागजी मुद्रा यानी पत्र मुद्रा का प्रचलन है।ठीक उसी प्रकार दूसरे देशो जैसे अमेरिका में जो डॉलर है वो प्लास्टिक का बना हुआ है।मतलब की इस दुनिया मे अलग अलग देशो में अलग अलग प्रकार की मुद्रायें उपयोग होती है।

एटीएम सह डेबिट कार्ड

आर्थिक विकास के इस दौर में बैंकिंग संस्थाओं के द्वारा प्लास्टिक के एक टुकड़े को भी मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाने लगा है।प्लास्टिक मुद्रा का एक रूप एटीएम है।

Devlopment Of Money-मुद्रा का विकास 2019

मुद्रा का विकास

हमारा भारत देश बहुत बड़ा है।इतना बड़ा की इस दुनिया मे दूसरी सबसे अधिक आबादी वाला देश है।तो आप समझ जाए कि ये देश कितना बड़ा है।अभी इस देश की आबादी लगभग 137 करोड़ है।इसे नियंत्रण करने के लिए भी इस देश मे मुद्रा की आवश्यकता होती है।जैसे कि आप किसी प्रकार की खरीदारी करते है तो आप दुकानदार को भुगतना करते है।तो अगर हम जीवित रहना है तो हमे रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदनी पड़ेगी।और खरीदने पर भुगतान करना पड़ेगा।साथ ही भुगतान करने के लिए आपके पास मुद्रा की आवश्यकता होगी।तो बात घूम फिर के मुद्रा पर आ ही जाती है।तो आज हम मुद्रा के विकास पर बात करेंगे।की पहले मुद्रा किस अवस्था मे थी।अब किस अवस्था मे है।कैसे विकास हुआ।क्या विकास हुआ।तो नीचे आपको सभी प्रकार की जानकारी बारी बारी से मिल जाएगी।तो इस आर्टिकल को निचे स्वाइप करे ओर आगे पढ़े।
Development of money,मुद्रा का विकास
Development of money

वस्तु मुद्रा अवस्था

प्रारंभिक काल मे किसी एक वस्तु को मुद्रा के कार्य सम्पन्न करने के लिए चुन लिया गया था।और शिकार युग मे खाल या चमड़ा, पशुपालन युग मे कोई पशु जैसे गाय या बकरी जैसे तथा कृषि युग मे कोई अनाज जैसे कपास या गेहू आदि को मुद्रा का कार्य सम्पन्न करने के लिए चुना गया था।उस काल मे इसे ही मुद्रा के रूप में प्रयोग मिया गया।क्योंकि उस समय लोग इतने जानकार नही थे।ना ही कोई अधिक पढ़ा लिखा।तब उनके समय मे एक नाप बनाया गया जैसे अभी हम रुपये से सामान खरीदते है।उस समय मे लोग किसी वस्तु से वस्तु का लेनदेन करए थे।जैसे एक बकरी बराबर 10 किलो आटा या चावल।इस प्रकार की मुद्राओं का प्रयोग होता था उस समय।लेकि अभी दुनिया काफी आगे निकल गयी है।तो यह सुविधा अब नही रही।

सिक्के(धातु) वाली मुद्रा

प्रारंभिक काल मे किसी एक वस्तु को मुद्रा के कार्य सम्पन्न करने के लिए चुन लिया गया था।और शिकार युग मे खाल या चमड़ा, पशुपालन युग मे कोई पशु जैसे गाय या बकरी जैसे तथा कृषि युग मे कोई अनाज जैसे कपास या गेहू आदि को मुद्रा का कार्य सम्पन्न करने के लिए चुना गया था।उस काल मे इसे ही मुद्रा के रूप में प्रयोग मिया गया।क्योंकि उस समय लोग इतने जानकार नही थे।ना ही कोई अधिक पढ़ा लिखा।तब उनके समय मे एक नाप बनाया गया जैसे अभी हम रुपये से सामान खरीदते है।उस समय मे लोग किसी वस्तु से वस्तु का लेनदेन करए थे।जैसे एक बकरी बराबर 10 किलो आटा या चावल।इस प्रकार की मुद्राओं का प्रयोग होता था उस समय।लेकि अभी दुनिया काफी आगे निकल गयी है।तो यह सुविधा अब नही रही।

पत्र मुद्रा का प्रचलन

पत्र मुद्रा यानी कगज द्वारा बना हुआ मुद्रा।एक ऐसा कागज जो किसी देश के सरकार द्वारा व गवर्नर के द्वारा मुहर और हस्ताक्षर किया गया हो वो एक पत्र मुद्रा के रूप में मन जाता है।सिक्के को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाने में कठिनाई  होती थी।इसलिए पत्र मुद्रा का प्रचलन शुरू हुआ।वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशो में पत्र मुद्रा का ही प्रचलन है।देश का केंद्रीय बैंक कागजी नोट का प्रचलन करता है।हमारे देश का केंद्रीय बैंक RBI-Reserve Bank Of India है।मतलब हमारे देश मे जितने भी प्रकार के मुद्रायें प्रचलित है।सारे के सारे RBI के द्वारा ही जारी किया जाता है।इस कागजी मुद्रा को बनाने के लिए हमारी सरकार दूसरे देशो से एक खास प्रकार की कागज मंगवाती है।और उसके बाद हमारे ही देश में इसकी छपाई होती है।

प्लास्टिक मुद्रा

प्लास्टिक मुद्रा मतलब की या मुद्रा प्लास्टिक से बना हुआ है।आजकल प्लास्टिक मुद्रा का प्रचलन जोरो पर है।प्लास्टिक मुद्रा के एटीएम सह डेबिट कार्ड,क्रेडिट कार्ड आदि प्रसिद्ध है।जैसे कि हमसब जानते है कि हमारे देश मे कागजी मुद्रा यानी पत्र मुद्रा का प्रचलन है।ठीक उसी प्रकार दूसरे देशो जैसे अमेरिका में जो डॉलर है वो प्लास्टिक का बना हुआ है।मतलब की इस दुनिया मे अलग अलग देशो में अलग अलग प्रकार की मुद्रायें उपयोग होती है।

एटीएम सह डेबिट कार्ड

आर्थिक विकास के इस दौर में बैंकिंग संस्थाओं के द्वारा प्लास्टिक के एक टुकड़े को भी मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाने लगा है।प्लास्टिक मुद्रा का एक रूप एटीएम है।

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